प्रातः उठते ही इस प्रकार बोलें यह श्लोक – कभी भी नही होगी पैसों की तंगी

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठना स्वास्थ्य और धर्म के लिए काफी लाभदायक 
रहता है। जैसे ही नींद खुलती है तो सबसे पहले व्यक्ति को अपने दोनों 
हाथों को देखना चाहिए।  हाथों को देखते समय यह मंत्र बोलना चाहिए- 


कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती ।
करमूले तू गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम ॥

अर्थ : हाथोंके अग्रभागमें लक्ष्मी, मध्यमें श्री सरस्वती एवं हाथों के मूल में गोविंद का वास होता है । इसलिए प्रात: उठने पर प्रथम हाथों का दर्शन करें ।


इस मंत्र व्यक्ति को महालक्ष्मी, सरस्वती और भगवान श्रीहरि की कृपा 
प्राप्त होती है। व्यक्ति कभी भी पैसों की तंगी का सामना नहीं करता है। 


भूमि (जमीन) अर्थात् पृथ्वी अथवा भूमाता । बच्चो, भूमिपर आप खेलते हैं । भूमिके कारण मनुष्यको अनाज, साग-तरकारी, फल, पानी जैसी अनेक वस्तुएं मिलती हैं । अनाज बोनेके लिए तथा पानीके लिए कुआं बनानेके लिए भूमिको खोदा जाता है । उस समय होनेवाले सब आघात भूमि सहन करती है । छोटे-बडे सभीका बोझ वह संभालती है इसलिए प्रात: उठनेपर भूमिपर पैर रखनेसे पूर्व निम्नलिखित श्लोक बोलें ।

समुद्र वसने देवी पर्वत स्तन मंडिते ।
विष्णु पत्नी नमस्तुभ्यं पाद स्पर्शं क्षमश्वमेव ॥


अर्थ : समुद्ररूपी वस्त्र धारण करनेवाली, पर्वतरूपी स्तनोंवाली एवं भगवान श्रीविष्णुकी पत्नी हे भूमिदेवी, मैं आपको नमस्कार करता हूं । मेरे पैरों का आपको स्पर्श होगा । इसके लिए आप मुझे क्षमा करें ।

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  1. It is said that putting this mantra in service, RAVAL-LANKESH had made his empire of GOLD,he had made his country Lanka -"sone ki lanka ".
    This mantra was given by Lord shiva to Ravan .This mantra is very effective &it gives immediate result also. Jay Dwarkadhish.

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