banner goes here

शबरी की कथा

Browse By

Your Ad Here
banner goes here

 

शबरी एक बदसूरत लड़की थी, पर दिल से वह बहुत अच्छी थी | जब वह 14/15 साल की हुई तभी, उसके माता पिता को उसके विवाह की चिंता होने लगी| शबरी की नाक के छेद बहुत बड़े बड़े थे | होंठ भी बहुत मोटे मोटे थे|

रंग भी सावला/काला था| उसकी शकल डरावनी सी थी, इसलिए कोई भी लड़का उसको पसंद नहीं कर रहा था| शबरी के माता पिता ने शबरी को दिखाए बिना उसकी शादी एक लड़के से तय कर दी|

शादी हो गई, जैसे ही लड़के ने शबरी को देखा, वह घबरा गया, कि पूरी ज़िन्दगी इस लडकी के साथ कैसे बिताई जाएगी | वह शबरी को चुप चाप किसी जंगल में छोड कर भाग गया |शबरी वहीँ कहीं बैठ कर रोने लगी|

भगवान की कृपा से मतंग मुनि वहां से निकल रहे थे| मतंग मुनि ने शबरी को देखा और पुछा ,बेटी तुम यहाँ क्यों बैठी हो ? कहाँ जाना है ? शबरी ने अपने पति द्वारा यहाँ छोर कर भाग जाने की बात बताई| मुनि ने कहा बेटी, यहाँ जंगली जानवर आते रहते है, तुम मेरे साथ, मेरी कुटिया में रहो | शबरी मुनि के साथ उनकी कुटिया में चली गई| अब वह कुटिया की सफाई करती, फल फूल चुन कर लाती |
सुबह बहुत जल्दी उठ कर भगवान की सेवा करती | मतंग मुनि काफी बूढ़े हो रहे थे| एक दिन उन्होंने शबरी को बुलाया और कहा, बेटी मै अब दुनिया से जाने वाला हूँ| तुम इस कुटिया में ही रहना | शबरी रोने लगी, आप ही तो हो जिन्होंने मुझे पिता का प्यार दिया, अब आप भी जा रहे हो| मै तो अकेली रह जाऊँगी |

मुनि ने अंतिम साँसे लेते हुए शबरी से कहा, तुम भगवान की सेवा करती रहना| तुमसे मिलने इस कुटिया में स्वयं भगवान आएँगे| मतंग मुनि ने आँखें बंद कर ली|

“क्या मेरी कुटिया में भगवान् आयेंगे ? कब आयेंगे ? कब आयेंगे मेरी कुटिया में भगवान् | मेरी कुटिया में तो भगवान् आयेंगे | अरे अरे मेरी कुटिया तो गंदी लग रही है , उसे जल्दी से साफ़ कर दूं” – शबरी तो मानों पागल हो गई |अब तो शबरी रोज भगवान के आने का इन्तजार करने लगी | ऋषि मुनियों के उठने से पहले ही उठ जाती| भगवान् के आने के लिए वो हर रास्ते, हर जगह की सफाई कर देती |

शबरी, सुबह-सुबह नदी में नहा धोकर , रास्ते से भगवान के लिए फल फूल ले आती | वह प्रतिदिन पलकें बिछाए भगवान के आने का इंतजार करती और सारे रास्ते को फूलों से सजा कर रखती| क्या पता कब भगवान आ जाएं | प्रतिदिन भगवान् के लिए कोई न कोई फल रखती | उसे चखकर देखती, मीठा होने पर भगवान को खिलाने के लिए रख देती|
रात होने पर उसे लगता आज भगवान नही आये तो कल जरुर आयेंगे |

फिर अगले दिन सुबह से भगवान के आने की तैयारी का क्रम शुरू हो जाता |
शबरी को देखकर ऋषि मुनियों के शिष्य उसे कहते कि “ तुम्हारी कुटिया में कहाँ से भगवान आयेगे, भगवान तो बड़े-बड़े ऋषि मुनियों की कुटिया में जायेंगे |”
परन्तु शबरी को अपना लक्ष्य पता था , उसे पूर्ण विश्वास था कि भगवान उसकी कुटिया में अवश्य आएंगे|

दिन बीतते गए, साल बीतते गए | शबरी इसी तरह रोज ,भगवान् के इंतज़ार में लगी रहती | अब शबरी वृद्ध भी हो गई थी| परन्तु मन में दृढ़ निश्चय था कि “ मेरी कुटिया में भगवान अबश्य आएंगे”|

जब श्री राम और लक्ष्मण, सीता की खोज करते हुए वहां आये तो लोगों में उत्साह देखते ही बनता था
“देखो देखो भगवान् आए हैं| साथ में भैया लक्ष्मण भी हैं |”
“सभी ऋषि मुनि भगवान् की तपस्या करते हैं , आज उनकी तपस्या सार्थक हो गयी | देखो भगवान् स्वयं चलकर उनकी कुटिया में पधार रहें हैं “
“हमने भी इनके दर्शन कर लिए , हमारा जन्म भी सार्थक हो गया “

“ अरे अरे ! देखो वो तो सीधा शबरी की कुटिया में जा रहें हैं | यह क्या लीला हैं भगवन ?”
यह कोई लीला नहीं, यह तो भगवान् का प्रेम है| | बड़े-बड़े ऋषि मुनि भगवान् से प्रार्थना करते रह गए – “भगवन कभी तो हमारी कुटिया में पधारें| एक बार ही सही , केवल एक बार भगवन”|

आज तो शबरी के पाँव जमीन पर नहीं पड़ रहे , और पड़ें भी कैसे – आज भगवान् जो उसके घर पधारे हैं| शबरी के प्रेम के आगे भगवान् आने को विवश हो गए | कैसे ना आते ?
शबरी ने जैसे ही भगवान को देखा अपनी सुधबुध सब कुछ भूल गई|
भगवान के इंतज़ार में बिछी पलकें , भगवान को देखते ही झपकना भूल गई | बस वो तो भगवान् को प्यार से देखती रह गई| पलकों ने आंसुओं की बारिश कर दी| भीगी पलकों से शबरी भगवान् की सेवा में लग गई |

शबरी ने दोनों हाथों को जोड़कर , भगवान को प्यार से अपने पास बैठाया | फिर खुद जमीन पर बैठकर भगवान् को बेर खिलाने लगी | हर बेर को पहले खुद खाकर देखती , यदि मीठा हुआ तो भगवान् को देती
भगवान् भी शबरी के प्रेम में वशीभूत होकर शबरी के जूठे बेर खाते जा रहे थे |

कितने प्यारे हैं हमारे भगवान् जो भक्त के प्रेमभाव में डूब जाते हैं|
उसके बाद भगवान ने शबरी को अपने धाम में भेज दिया, ऐसे धाम जो कि करोड़ों-करोड़ों पुण्यों से भी प्राप्त नहीं होता |
जय श्री राम…