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अपने अंदर छुपी दिव्य शक्तियों को जाग्रत करने का मन्त्र – कुण्डलनी जागरण भी इसी मन्त्र से संभव है

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प्रत्येक व्यक्ति में अनेकानेक शक्तियां होती हैं जिनका उपयोग करके वह उन्नति के नित नए आयामों को छू सकता है। किन्तु बहुत कम लोग ही अपनी इन शक्तियों को पहचान पाते हैं क्योंकि यह दिव्य शक्तियां मनुष्य में सुप्त अवस्था में रहती हैं अतः इन्हें जाग्रत करना पड़ता है। यदि आप भी अपनी आंतरिक शक्तियों को जगा कर उन्नति करना चाहते हैं तो निम्नलिखित मन्त्र का रोज कम से कम एक माला यानि १०८ बार जप करें।  मन्त्र इस प्रकार है :-

“|| ॐ ह्रीं मम प्राण देह रोम प्रतिरोम चैतन्य जाग्रय ह्रीं ॐ नम: ||  “
इस मन्त्र के निरंतर जप से आंतरिक शक्तियां जाग्रत होने लगती हैं और कुण्डलनी जागरण भी संभव है।
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