chandaal

विभिन्न समस्याएं और कष्ट हो तो स्वयं देखें की कहीं आपकी कुंडली में चांडाल योग तो नहीं – अवश्य पढें और करें निदान

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चांडाल शब्द का अर्थ होता है क्रूर कर्म करनेवाला,नीच कर्म करनेवाला*
⚫ राहू और केतु दोनों छाया ग्रह है. पुराणों में यहराक्षस है. पौराणिक मान्यता के अनुसार राहू और केतुके लिए राहू राक्षस का मस्तकहै तो केतु उसका धड़ ज्योतिषशास्त्र में राहू पाप। -केतु दृष्टीहीन होने के कारण उतना अशुभ नही हैदोनों पाप ग्रहहै.
अत: यह दोनों ग्रह जिस भाव में या जिस ग्रह केसाथ हो उस भाव या उसग्रह संबंधी अनिष्ठ फल दर्शाता है.
*यह दोनों ग्रहचांडाल जाती के है.इसलिए इनकी युति को चांडाल( राहू-केतु ) योग कहा जाता है*
* ⚫ कैसे होता है चाण्डाल योग⚫ *
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⚫ जब कुण्डली में राहु या केतु जिस गृह के साथ बैठ जाते
है तो उसकी युति कोही चाण्डाल योग कहा जाता है ये मुख्य रूप से सातप्रकार का होता है
*▶1- रवि-चांडाल योग -*सूर्य के साथ राहू या केतु होतो इसे रवि चांडाल योगकहते है. इस युति को सूर्य ग्रहण योग भी कहा जाताहै. इस योग में जन्म
लेने वाला अत्याधिक गुस्सेवाला और जिद्दी होताहै. उसे शारीरिक कष्ठ भीभुगतना पड़ता है. पिता के साथ मतभेद रहता है और
संबंध अच्छे नहीं होते.पिता की तबियत भी अच्छी नहीं रहती.
*▶2- चन्द्र-चांडाल योग -*चन्द्रके साथ राहू या केतु हो तो इसे चन्द्र चांडाल योगकहते है. इस युति कोचन्द्र ग्रहण योग भी कहा जाता है. इस योग में जन्मलेने वाला शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य नहीं भोग पाता. माता संबंधीभी अशुभ फल मिलता है. नास्तिकहोने की भी संभावना होती है.
*▶3- भौम-चांडाल योग -* मंगल के साथ राहूया केतु हो तो इसे भौम चांडाल योग कहते है. इसयुति को अंगारक योग भी कहाजाता है. इस योग में जन्म लेनेवाला अत्याधिकक्रोधी, जल्दबाज, निर्दय औरगुनाखोर होता है. स्वार्थी स्वभाव, धीरज नरखनेवाला होता है. आत्महत्या याअकस्मात् की संभावना भी होती है.
*▶4- बुध-चांडाल योग -*बुध के साथराहू या केतु हो तो इसे बुध चांडाल योग कहते है.बुद्धि और चातुर्य के ग्रहके साथ राहू-केतु होने से बुध के कारत्व को हानीपहुचती है. और जातकअधर्मी. धोखेबाज और चोरवृति वाला होता है.
*▶5- गुरु-चांडाल योग -*
गुरु के साथ राहू या केतु हो तो इसे गुरु चांडाल योगकहते है. ऐसा जातकनास्तिक, धर्मं में श्रद्धा न रखनेवाला और नहीं करनेजेसे कार्य करनेवालाहोता है.
*▶6- भृगु-चांडाल योग -* शुक्र के साथ राहू या केतु होतो इसेभृगु चांडाल योग कहते है. इस योग में जन्म लेनेवालेजातक का जातीय चारित्रशंकास्पद होता है. वैवाहिक जीवन में भी काफीपरेशानिया रहती है. विधुर याविधवा होने की सम्भावना भी होती है.
*▶7- शनि-चांडाल योग -* शनि के साथराहू या केतु हो तो इसे शनि चांडाल योग कहते है. इसयुति को श्रापित योगभी कहा जाता है. यह चांडाल योग भौम चांडालयोग जेसा ही अशुभ फल देता है.जातक झगढ़ाखोर, स्वार्थी और मुर्ख होता है. ऐसेजातक की वाणी और व्यव्हारमें विवेक नहीं होता. यह योग अकस्मात् मृत्यु की तरफभी इशारा करता है.
🌹 अस्तु आप भी देखे कहीं आपकी कुण्डली में भीचाण्डाल योग तो नहीं है यदि होतो इसकी शांति शमन अवश्य करे क्योंकि कहा जाताहै की शान्ति का उपाय करकेजीवन को खुशहाल बनाया जा सकता है ।
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