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सिर्फ पाँच लाइनों का अतिदुर्लभ गणपति स्त्रोत – कोई भी सांसारिक मनोरथ ऐसा नहीं जो इसके पाठ से सिद्ध न हो सके – आजम कर देखें

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश स्वयं मंगल मूर्ति हैं और दुनिया में ऐसा कोई मनोरथ नहीं है जिसकी पूर्ति भगवान श्री गणेश की कृपा से न हो सके।  यदि आपके मन में भी कोई ऐसा मनोरथ हो या  बच्चों से संबधित कोई समस्या हो तो सभी समस्या हेतु यह सर्वतारण उपाय है। जैसे – बच्चे न होना या जीवित न रह पाना बच्चा मंद बुद्धि पढ़ने मे पीछे हो, यह विशेष मंत्र बच्चों को  रोजगार व्यवसाय प्रदान कर भटकाव भ्रम से मुक्त करता है। इस मंत्र का जाप बच्चे युवा एंव उनके माता – पिता कर सकते है।

 

स्त्रोत –

एकदंष्ट्रोत्कटो देवो गजवक्त्रो महाबल:।
नागयज्ञोपवीतेन नानाभरण भूषित:॥
सवार्थसम्पद् उध्दारो गणाध्यक्षो वरप्रद:।
भीमस्य तनयो देवो नायकोsथ विनायक:॥
करोतु मे महाशांति भास्करार्चनतत्पर:॥

 

 

विधि –

किसि भी शुक्ल पक्ष की चर्तुथी तिथि को प्रथमपूज्य भगवान गणपति जी के श्री विग्रह का पंचोपचार पूजन करके इस स्त्रोत का प्रतिदिन बारह बार पाठ करे। ध्यान रहे भगवान श्री गणेश को मोदक और दुर्वा अतिप्रिय है इसलिए यथा संभव विशेष प्रयास करके स्तोत्र पाठ के पहले या बाद में दुर्वा और मोदक अवश्य ही अर्पित करें।

 

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